मिर्गी का आयुर्वेदिक इलाज – Mirgi (Epilepsy) Ka Aryurvedik Ilaj in Hindi

मिर्गी का आयुर्वेदिक इलाज : मिर्गी का आयुर्वेदिक इलाज ये एक आम समस्या नहीं है और ये बीमारी किसी किसी व्यक्ति को होती है और इसके मरीज भी आपको कम ही देखने को मिलेंगे लेकिन ये बीमारी जिस भी व्यक्ति को होती है. उसे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है और इस बीमारी को एक और नाम से भी जाना है मिर्गी को अपस्मार या Neurological disorder भी कहते है और यह कोई शारीरिक बीमारी नहीं है बल्कि ये एक बहुत ही गंभीर मानसिक विकार और रोग है और Seizure Disorder यानि शरीर में अचानक से अकड़न आ जाये तो ये मिर्गी कहते है और मिर्गी का आयुर्वेदिक इलाज भी है.

मिर्गी (Epilepsy) के कुछ लक्षण

मिर्गी आने के कुछ लक्षण है जिन्हे आप आसानी से पहचान सकते है और यदि किसी व्यक्ति के शरीर में आप इन लक्षणों को देखेंगे तो उसे शयद मिर्गी का दौरा आने की बीमारी हो सकती है. मिर्गी एक दिमागी बीमारी है और ये ज्यादातर युवा वर्ग के लोगो को हो सकती है और इसलिए मिर्गी का आयुर्वेदिक इलाज बहुत जरूरी है. इस बीमारी के होने के लक्षण है जैसे अचानक हाथ, पैर और चेहरे के मांसपेशियों में बहुत तेज खिचाव होता है और मरीज़ के हाथ पैर बुरी तरह से अकड़ जाते है और मिर्गी का दौरा पड़ने पर पीड़ित की आंखें और सर बहुत तेजी से हिलने लगते है और पेट में दर्द होने लगता है.

मिर्गी का आयुर्वेदिक इलाज

पीड़ित के मुख से सफ़ेद रंग का झाग निकलने लगता है. और पीड़ित को बेहोशी आ जाती है.और ये बेहोशी लगभग 10 मिनट से 2 घंटे तक रहे तो ये मिर्गी का लक्षण है.मिर्गी आने के कई सारे कारण हो सकते है और ये कारण बहुत मामुली भी हो सकते है. जैसे बचपन में सर पर चोट लगने के कारण और ये एक अनुवांशिक रोग भी है और जन्म के समय यदि शिशु के शरीर में और मस्तिष्क में ऑक्सीजन ठीक तरह से न पहुँचने के कारण भी ये बीमारी हो सकती है. जिस व्यक्ति को ब्रेन ट्यूमर हो उसे से मिर्गी के दौरे आते है और ब्रेन स्ट्रोक होने पर ब्लड वेसल्स को क्षति पहुँचती है.मिर्गी का आयुर्वेदिक इलाज

न्यूरोलॉजिकल डिज़ीज जैसे अल्जाइमर रोग, जेनेटिक कंडिशन, कार्बन मोनोऑक्साइड के विषाक्तता के कारण भी मिर्गी का रोग होता है. ड्रग एडिक्शन और एन्टीडिप्रेसेन्ट के ज्यादा इस्तेमाल होने पर भी मस्तिष्क पर प्रभाव पड़ सकता है. मिर्गी आने के कई सरे कारण जैसे यदि कई और कारण है जिअसे ज्यादा शराब का सेवन करना है.मिर्गी आने के कई सरे कारण जैसे यदि कई और कारण है जिअसे ज्यादा शराब का सेवन करना है.

बादाम, बड़ी इलायची, अमरूद और अनार के 17 पत्ते सब को कूटकर दो गिलास पानी में उबाले जब पानी आधा रह जाये तो नमक मिलाकर पिला दें। इस तरह दिन में दो बार पिलायें कुछ ही दिनों में मिरगी रोग समाप्त हो जाता है. अंगूर का रस मिर्गी रोगी के लिये अत्यंत उपादेय उपचार माना गया है. आधा किलो अंगूर का रस निकालकर प्रात:काल खाली पेट लेना चाहिये. यह उपचार आपको कुछ ही महीनो में ही लाभ होगा और आपको यह बीमारी फिर कभी नहीं होगी.

मिर्गी का आयुर्वेदिक इलाज – Epilepsy Treatment In Hindi

नमक के पानी से नहाने से भी ये आपके मिर्गी के लोग को ठीक कर देता है और इस उपाय से दौरों में कमी आ जाती है और दौरे भी नहीं आते है. पानी में गीली करके रोगी के पूरे शरीर पर प्रयुक्त करना अत्यंत लाभकारी उपचार है. एक घंटे बाद नहालें. इससे दौरों में कमी होकर रोगी स्वस्थ अनुभव करेगा. Vitamin-B-6 (पायरीडाक्सीन) का प्रयोग भी मिर्गी रोग में परम हितकारी माना गया है. और इस विटामिन B6 गाजर, मूम्फ़ली, चावल, हरी पतीदार सब्जियां और दालों में सबसे ज्यादा पाया जाता है. इसलिए आप विटामिन का सेवन करें और सभी विटामिन B6 शरीर के कई रोगों को ठीक करने में भी आपकी मदद करते है और इस रोग के होने पर आपको कई तरह की सावधानियां रखनी चाहिए.

मिइसके लिए एन्टी एपिलेप्टिक ड्रग (Anti-Epileptic Drug (AED) थेरपी और सर्जरी होती है. खानपान- रिसर्च के अनुसार मिर्गी के रोगी को ज्यादा फैट वाला और कम कार्बोहाइड्रेड वाला डायट लेना चाहिए. मिर्गी का आयुर्वेदिक इलाज भी है. इससे सीज़र पड़ने के अंतराल में कमी आती है. और इलाज के दौरान आपको ज्यादा मानसिक तनाव में नहीं रहना चाहिए और डॉक्टर द्वारा दिए गए दवा का सही तरह सेवन करना चाहिए. और नियमति रूप से संतुलित आहार लेना चाहिए.