फंगल इन्फेक्शन का इलाज

फंगल इन्फेक्शन का इलाज: फंगल इन्फेक्शन आमतौर पर एक संक्रामक रोग हैं| ये आमतौर पर कवक से होनी वाली समस्या हैं| इसमें इन्फेक्शन से त्वचा की उपरी सतह पर पपड़ी आ जाती हैं| हाथ पैरों और शरीर में खुजली होने लगती हैं पैरों के नाखूनों का पीला और मोटा हो जाना हो जाना कुछ इस तरह के लक्षण दिखने लगते हैं|

fungal infection se bachne ke upay in hindi
फंगल इन्फेक्शन के लक्षण

Fungal infections are usually an infectious disease. These are usually fungal problems. In this, the skin gets on the upper surface of the skin from infection. Hands begin to appear in the legs and the body is itching. Feet nails become pale and thick, some such symptoms begin to appear

इस इन्फेक्शन के कारण त्वचा पर लाल चकते बनाना शुरू हो जाते हैं| और इनके चारो और खुजली होने लगती हैं| जहाँ पसीना ज्यादा आता हैं वहां खुजली ज्यादा होती हैं| आज कल की सक्रीय जीवनशैली के कारण फंगल इन्फेक्शन किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकता हैं ये इसके लिए कोई बड़ी बात नहीं हैं|(फंगल इन्फेक्शन का इलाज)

पर्यावरण में कवक की 50,000 से अधिक विभिन्न प्रजातियां हैं| लेकिन केवल 20 से 25 प्रजातियां मनुष्यों में संक्रमण का कारण बनती हैं वास्तव में, कई कवक हैं| जो आपकी त्वचा पर कई वर्षों तक बिना किसी समस्या का कारण बने रह सकते हैं| कभी-कभी कुछ कारक कवक को अधिक मात्रा में बढ़ा सकते हैं.

त्वचा संक्रमण और उसके उपाय

ये संक्रमण आपकी त्वचा की सतह पर, त्वचा गुना के भीतर या किसी भी अन्य क्षेत्र में हो सकती हैं| जो गर्म और नम हैं छीलने वाली त्वचा, फटा त्वचा, लालिमा, फफोले, जलन, खुजली कवक संक्रमण के सबसे आम लक्षण हैं| फंगल संक्रमण की गंभीरता भिन्न लोगों के लिए भिन्न हो सकती हैं| ये संक्रमण अत्यधिक संक्रामक होते हैं|

जिन्हें यदि अनियंत्रित और अनुपचारित छोड़ दिए जाएं, तो यह कवक संक्रमण शरीर के अन्य भागों में फैल सकते हैं| इसलिए, जितना जल्दी हो सके फंगल संक्रमण को नियंत्रित करना आवश्यक हैं| नहीं तो ये आपके और आपके परिवार के किसी भी सदस्य को नुकसान पंहुचा सकता हैं|

फंगल इन्फेक्शन के प्रकार

एथलीट्स फुट (Athlete’s Foot): इसमें पैरो में संक्रमण होता हैं| गर्म और नर्म  वातावरण में जूते, मोज़े आदि के उपयोग से ये इन्फेक्शन होता हैं| त्वचा का छिलना, घाव हो जाना,  लाल होना, खुजली आदि के होने से भी ये रोग हो सकता हैं|

कैंडीडीयासिस (Candidiasis): इसमें मुंह, आंत और योनि में संक्रमण होता हैं| ये इन्फेक्शन आम लोगों में नहीं होता हैं ये इन्फेक्शन उन लोगों में होता हैं| जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती हैं|

दाद (dad): दाद का होना एक आम बात हैं ये त्वचा पर आसानी से हो जाती हैं| ये आपके शारीर के किसी भी हिस्से पर हो सकती हैं| इस दाद का होने का खतरा चोट लगने पर ज्यादा होता हैं|

मुंह में थ्रश होना: कैंडिडा नामक एक यीस्ट के कारण मुंह में थ्रश का संक्रमण हो जाता हैं| इसमें जीभ पर सफ़ेद रंग की परत बन जाती हैं और अंदरूनी गाल पर हल्के पीले रंग के परत होने लगती हैं| ये आमतौर पर कमजोर करने वाली दवाओ के खाने वाले लोगो में अधिक होता हैं|

फंगल इन्फेक्शन के कारण 

शारीर का अधिक नमी में होने के कारण|
त्वचा पर फफूंद संक्रमण के कारण|
योनि रोग प्रतिरोधी के क्षमता का कम होने के कारण|
गीले कपडे पहनने के कारण|
स्किन के कटने या फटने पर भी फंगल इन्फेक्शन हो सकता हैं|
कही समय पुराने जूते व कपड़ो के इस्तेमाल से|
आपने आप को अच्छे से साफ न रखने के कारण|
नाखूनों को समय समय साफ न करना व काटना नहीं|
अपने मुंह की सफाई अच्छे से न करने के कारण|

फंगल इन्फेक्शन के लक्षण

रैशस, लाल रंग के चकत्ते होना|
त्वचा में लाल या बैगनी रंग के पैच्स होना|
प्रभावित क्षेत्रों में सफेद पाउडर की तरह पदार्थ का निकलना|
त्वचा में पपड़ी जमना|
त्वचा में दरारे होना|
इन्फेक्शन से प्रभावित हिस्से में दर्द होना|
त्वचा का कुछ हिस्सा सफ़ेद और नर्म हो जाना|
पस के साथ साथ दाने हो जाना|

फंगल इन्फेक्शन का इलाज

फंगल इन्फेक्शन का देशी इलाज
हाथ में फंगल इन्फेक्शन

एप्पल साइडर सिरका:

एप्पल साइडर सिरका किसी भी प्रकार के फंगल इंफेक्‍शन के लिए बहुत आम इलाज हैं| एंटीमाइक्रोबील गुणों की उपस्थिति के कारण सेब साइडर सिरका, संक्रमण पैदा करने वाले कवक को मारने में मददगार शाबित होता हैं|
इसके अलावा, इसकी हल्‍‍की एसिडिक प्रकृति संक्रमण को फैलने से रोकने में मदद करती हैं| और स्‍वास्‍थ्‍य लाभ को बढ़ावा देता है| समस्‍या होने पर एक कप गर्म पानी में दो बड़े चम्‍मच सेब साइडर सिरका मिलाकर पीयें|

दही:

आप सादे दही का इस्‍तेमाल फंगल इन्फेक्शन में कर सकती हैं| क्योकि सादा दही में मौजूद प्रोबायोटिक्‍स लैक्टिक एसिड का निर्माण कर कवक के विकास को जांच में रखता हैं| समस्‍या होने पर सादा दही कॉटन पर लेकर संक्रमित हिस्‍से पर लगाकर 30 मिनट के लिए छोड़ दें, फिर गुनगुने पानी से धो लें| इस उपाय को संक्रमण के साफ होने तक एक दिन में दो बार लगाये|

लहसुन:

लहसुन में उपयोगी एंटीफंगल गुण मौजूद होते हैं जिस कारण से यह किसी भी प्रकार के संक्रमण का बहुत ही प्रभावी उपाय हैं| इसके अलावा इसमें और भी गुण मजूद है जैसे एंटीबैक्‍टीरियल और एंटीबायोटिक आदो जो रिकवरी की प्रक्रिया के लिए महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाते हैं|

समस्‍या होने पर दो लहसुन की कली को अच्‍छे से कुचलकर, उसमें जैतून के तेल की कुछ बूंदें मिलाकर बारीक पेस्‍ट बना लें| फिर इस पेस्‍ट को संक्रमित हिस्‍से पर लगाकर 30 मिनट के लिए छोड़ दें| फिर गुनगुने पानी से त्‍वचा के उस हिस्‍से को धो लें|

टी-ट्री ऑइल- चाय के तेल से फंगल इन्फेक्शन का इलाज

fungal nail infection treatment with tea tree oil
How to Use Tea Tree Oil to Treat Fungal Nail Infection

फंगल संक्रमण का कारण बनने वाले कवक को दूर करने में मदद करता हैं| टी-ट्री ऑइल साथ ही इसके एंटीसेप्टिक गुण शरीर के अन्‍य भाग में संक्रमण के प्रसार को रोकते हैं| टी ट्री ऑयल में ऑलिव ऑयल और बादाम के तेल को बराबर मात्रा में लेकर मिलाये| फिर इस मिश्रण को संक्रमित त्‍वचा पर लगाये|

हल्दी:

हम हल्दी के गुणों के बारे में तो जानते ही हैं| हल्दी को प्राकृतिक एंटीसेप्टिक, एंटीबायोटिक और एंटीफंगल गुणों के रूप में जाना जाता हैं| साथ ही, इसकी हीलिंग गुण उपचार को जल्‍द ठीक करने और संक्रमण को दोबारा होने से रोकता हैं| त्‍वचा के प्रभावित हिस्‍से पर कच्ची हल्दी के जड़ के रस को लगायें| दो से तीन घंटे के लिए इसे ऐसे ही छोड़ दें, और फिर गुनगुने पानी से धो लें| संक्रमण के दूर होने तक इस उपाय को दिन में दो बार करें|

फंगल इन्फेक्शन से बचाव

  • ठंडी व नमी के स्थान पर पैरों को साफ रखें| मोजों को हर रोज बदलना चाहिए आपकी खुद की पहनने की चीजो को कभी भी किसी के साथ भी समझा नहीं करना चाहिए|
  • बाथरूम, जिम, कारपेट और सार्वजनिक स्नान वाली जगहों पर नंगे पैर नहीं जाना चाहिए|
  • अपने चेहरे को नियमित रूप से धोना चाहिए और त्वचा को भी साफ रखना चाहिए|
  • आपका वज़न यदि ज्यादा हैं या आप मोटे हैं तो आप अपनी त्वचा को अच्छे से सुखाएं|
  • साफ और ढीली पेंट ही पहने ज्यादा टाइट कपडे न पहने|
  • नाखूनों व उनके उपरी हिस्से को अच्छे से साफ करें और नाखूनों को ज्यादा बढ़ने भी न दें.
  • समय समय पर नाखूनों को काटते रहे.
  • यदि आपके परिवार या दोस्तों में से किसी को फंगल इन्फेक्शन हैं, तो उसका तुरंत इलाज कराएँ.