गर्भ निरोधक गोलियों का राज़ – Garbh Nirodhak Goliyon ka Raaz

गर्भ निरोधक गोलियों का राज़ :- विदेशी कंपनियाँ हमारे देश में हमारी देश की माताओ, बहनो को गर्भ निरोधक उपाय बेचती हैं. और ये दवाएं गोलियों के रूप में बेचीं जाती है जिसमें कुछ के नाम कुछ इस प्रकार है. जैसे Norplant, Depo -Provera, I-pill है एक E – pill है. जिसमें से कुछ तो बहुत ज्यादा खतरनाक होती है इसलिए इन दवाओं के उपयोग के कारण कई साड़ी समस्यां भी हो जाती है. और आप लोगो को शायद ये पता नहीं होगा की जिन दवाओं का इस्तेमाल हमारे देश में औरतों करती है, ये सब वो अपने देश की औरतों के लिए नहीं बेचती है. ये केवल वो हमारे देश में बेचीं जाती है. जैसे ये Depo-Provera नाम की तकनीक विकसित की है. ये अमेरिका की एक कंपनी ने विकसित किया है कंपनी का नाम आबजोन है. इस कंपनी को अमेरिका सरकार ने बंद कर दिया गया है. गर्भ निरोधक गोलियों का राज़ बहुत गहरा है.

ये इंजेक्शन के रूप मे भारत की औरतों को बेचा जाता है. महवारी का चक्र है इसको पूरा बिगाड़ देता है. और उनके अंत उनके यूटेरस मे कैंसर हो जाता है. और माताओ-बहनो की मृत्यु भी हो जाती है. और कई तरह के नशीली दवाओं को बेच कर ये नई बीमारियां फैला रहे यही और एक NET-EN नाम की गर्भ निरोधन के लिए तकनीकी लायी है. स्टेरॉइड्स के रूप मे ये माताओ बहनो को दे दिया जाता है या कभी इंजेक्शन  के रूप मे भी दिया जाता है.  इससे उनको गर्भपात हो जाता है. और उनके जो पीयूष ग्रंथी के हार्मोन्स है उनमे असंतुलन आ जाता है.और वो बहुत परेशान होती है जिनको ये NET EN दिया जाता है. गर्भ निरोधक गोलियों का राज़ जानकार आप हैरान हो जायेंगे

गर्भ निरोधक गोलियों का राज़

इसकी तरह से  RU- 496 नाम की एक तकनीक उन्होने ने आई है फिर रूसल नाम की एक है. फिर एक UKLF नाम की एक है फिर एक नॉरप्लांट है. फिर एक प्रजनन टीका उन्होने बनाया है सभी हमारी माताओ ,बहनो के लिए तकलीफ का कारण बनती है फिर उनमे ये बहुत बड़ी तकलीफ ये आती है ये जितने भी तरह गर्भ निरोधक उपाय माताओ बहनो को दिये जाते हैं. उससे यूटेरस की मांसपेशिया एक दम ढीली पड़ जाती है. और अक्सर मासिक चक्र के दौरान कई लड़कियां इनके इस्तेमाल से बेहोश हो जाती है, लेकिन उनको ये मालूम नहीं होता कि उनको ये कंट्रासेप्टिव नाम का जहर दिया गया है. और इस तरह हजारो करोड़ रुपए की लूट हर साल विदेशी कंपनियो द्वारा ये कंट्रासेप्टिव नाम का जहर बेच कर की जाती हैं.

इसके इलवा अभी 3 -4 साल मे कंडोम का व्यपार विदेशी कंपनियो दावरा बहुत बढ़ गया है और इसका प्रचार होना चाहिए इसके लिए AIDS का बहाना है, AIDS का बहाना लेकर अखबारो मे मैगजीनो मे एक ही बात क विज्ञापन कर रहे है कि आप कुछ भी करो कंडोम का इस्तेमाल करो. ये नहीं बताते कि आप अपने ऊपर सयम रखो. ये नहीं बताते कि अपने पति और पत्नी के साथ वफादारी निभाओ. वो बताते है कुछ भी करो अर्थात किसी की भी माँ , बहन बेटी के साथ करो ,बस कंडोम का इस्तेमाल करो. और इसका परिणाम पात क्या हुआ है मात्र 15 साल मे इस देश मे 100 करोड़ कंडोम हर साल बिकने लगे हैं. 15 साल पहले इनकी संख्या हजारो मे भी नहीं थी.

और इन कंपनियो का असली मकसद केवल पैसा कामना है और ये विदेशी चाहते है कि ये 100 करोड़ कंडोम एक साल नहीं एक दिन मे बिकने चाहिए. एड्स का हल्ला मचा कर बहुराष्ट्रीय कम्पनियों (साथ ही साथ देशी कम्पनियों ने भी) कण्डोम का बाजार खड़ा किया है और कई सौ करोड़ रूपये का सालाना कमाती है. हालांकि एड्स खतरनाक बीमारी है और यौन संसर्ग के अलावा कई अन्य तरीकों से भी इसका प्रसार होता है. जैसे इन्जेक्शन की सुई द्वारा, रक्त लेने से एवं पसीने के सम्पर्क द्वारा और भी कई तरह के तरीके है जिनसे ये फैलता है.

लेकिन बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की दम पर एड्स को रोकने के जिन तरीकों को ज्यादा प्रचारित किया जा रहा है उनमें हैं सुरक्षित सम्भोग और कण्डोम का प्रयोग है और डॉक्टर लार्डओकलिंग्स के अनुसार एक बार के यौन सम्पर्क से 0.1-1 प्रतिशत,  सुई से 0.5-1 प्रतिशत, रक्त चढाए जाने से 0.9 % एड्स होने की सम्भावना रहती है. इस तरह संक्रमित व्यक्ति के साथ सम्भोग या सुई के इस्तेमाल और रक्त चढाने से एड्स होने की बराबर सम्भावनाएं रहती हैं. देश में यौन सम्बन्धों के लायक सिर्फ 30 % लोग ही हैं. गर्भ निरोधक गोलियों का राज़ है ये गोलिया कैंसर का कारण है.

विलासी उपभोक्तावादी संस्कृति के इस दौर में कण्डोम संस्कृति और उस का प्रचार विवाहोतर यौन सम्बन्धों को बढ़ाकर इस बीमारी की जड को हरा ही बनायेंगे. हमारे देश में लगभग 40 करोड़ रूपये का कण्डोम देशी कम्पनियाँ और इतना ही कण्डोम विदेशी कम्पनियाँ बेच रही हैं. करीब 25-30 एजेन्सियाँ जापान, कोरिया, ताइवान, हांगकांग, थाइलैण्ड वगैरा से कण्डोम थोक के भाव मंगाती और बेचती हैं. हमारे देश करीब 20 देशी व 80 विदेशी ब्रांडो अर्थात 100 से ज्यादा ब्रांडो में 100 करोड़ से ज्यादा कण्डोम सालाना बिक रहे हैं.

”मुक्त यौन” की संस्कृति और उसे कण्डोम द्वारा सुरक्षा कवच पहना कर प्रचारित करने से युवाओं की उर्जा का प्रवाह किस दिशा में मोड दिया गया है. अंत सरकार और ये विदेशी कंपनिया AIDS रोकने से ज्यादा कंडोम की बिक्री बढ़ाना चाहती है. इसके लिए देश के युवाओ को बहलाया-फुसलाया जा रहा है. ताकि विवाह से पहले ही किसी भी लड़की के साथ संब्ध स्थापित करे. जिससे समाज और परिवार खत्म हो जाये. ताकि देश की सनातन संस्कृति को खत्म कर देश को जल्दी ही अमेरिका की कुत्ता संस्कृति मे मिलाया जाये. कुत्ता संस्कृति से अभिप्राय सुबह किसी के साथ, दोपहर किसी के साथ, अगले दिन किसी के साथ सम्भोग करते है.