कुत्ते के काटने का इलाज – Kutte Ke Katne Ka ilaj

कुत्ते के काटने का इलाज : – कई लोगो को जानवरों को पालने का शौक होता है और इसी शौक के चलते वे अपने गैरों में कुत्ते, बिल्ली, घोड़े आदि को पालते है. लेकिन कुछ जानवर का काटना बहुत ही खतरनाक होता है जिसमे कुत्ते के काटने पर बहुत ही गंभीर रोग हो जाते है और व्यक्ति पागल भी हो सकता है और उसकी जान तक जा सकती है. और कुछ लोगों को इसके बारे में जानकारी नहीं होती है और वो कुत्ते के काटने पर कुछ भी करने लगते है और उसी के इलाज करने के लिए वो गलत कदम उठा लेते है जो और भी खतरनाक होते है. डॉक्टर्स के अनुसार कुत्ते के काटने पर हमे कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए. कुत्ते के काटने का इलाज बहुत ही आसान है

कुत्ते के काटने का इलाज

जैसे काटे गए स्थान को किसी भी प्रकार के कपडे या पेपर से नहीं ढकना नहीं चाहिए उस घाव को खुला छोड़ दें.घाव वाले हिस्से को साबुन से धोन चाहिए और आपके घर में यदि शराब रखी हुयी है तो वो सबसे ज्यादा एंटीसेप्टिक का कार्य करती है इसलिए शराब को घाव पर डाल लें.और सबसे पहले डॉक्टर को दिखा लें एवं इन्फेक्शन से बचने के लिए सबसे पहले इंजेक्शन लगावा लें. और डॉक्टरी ये बताते है कि कुत्ते के काटने का इलाज इस तथ्य पर किया जाता है उसने कितनी जोर से काटा है. और इसके लिए घाव को साफ़ करना और इंजेक्शन जरूरी है. और यदि जिस कुत्ते ने कटा है वो पागल है या फिर अलर्क रोग से पीड़ित है तो ऊके द्वारा कटाने पर व्यक्ति पर मौत भी हो सकती है.

रैबीज़ एक बहुत बढ़ा गंभीर और खतरनाक वायरस है और जिसके करना बहुत ही जानलेवा और घातक बीमारी हो जाती है. और ये बीमारी इंसान को केवल कुत्ते के काटने से होती है. और जिस कुत्ते या जानवर को रैबीज़ है और ये रैबीज़ इंसानी शरीर में कुत्ते के लार के द्वारा प्रवेश करते है.और जब कुत्ता काटता है तो यह संक्रमित लार काटे गए स्थान पर घाव बनता और उसी में से शरीर में जाता है और ये ज्यादातर मांसाहारी जानवरों के काटने पर ही होता है.और रैबीज़ फ़ैलाने वाले जानवर है जैसे लोमड़ी, चीता, सियार, कुत्ते और चील आदि. यह बीमारी जंगलों में काफी आम होती है, बहुत से जानवर हर साल इस बीमारी से मर जाते हैं.

वायरस का मस्तिष्क में घुस जानावायरस मस्तिष्क में तंत्रिकाओं के माध्यम से घुसता है, खून से नहीं. काटे जाने व लार से वायरस जख्म में पहुँच जाता है. इसलिए वायरस स्थानीय तंत्रिका तन्तु में पहुँच जाता है. यहाँ से वो सभी तंत्रिकाओं, मेरुदण्ड और आखिर मस्तिष्क में पहुँच जाता है. क्योंकि रैबीज़ का संक्रमण तंत्रिकाओं के जरिए सब ओर पहुँचता है इसलिए काटे जाने वाले स्थान से मस्तिष्क तक पहुँचने वाली तंत्रिका जितनी लम्बी होगी उतनी ही अधिक समय में छूत मस्तिष्क तक पहुँचेगी. इसी तथ्य का इस्तेमाल ठीक लगाने के लिए भी किया जाता है.

रेबीज के लक्षण

घॉंव के जगह दर्द, काटे हुए अंग में हलकी सी संवेदना हीनता, कभी कभी कुछ खुजलन या झुनझुनाहट, बुखार और बाधित मांसपेशियों में कुछ अकडन, खास कर के बीमारी के पहले चरण में, आगे चलकर बेहोशी, धुंधलापन और पानी पीने से डर, तेज रोशनी या आवाज से दौरे चलना, हिंसात्मक अंदाज ये सभी प्रकार के लक्षण ये बताते है कि पीड़ित को रैबीज़ हो गया है या नहीं. और इस रोग को अलर्क भी कहते है.

कुत्ते के काटने पर रोगी को अँटीसिरम इंजेक्शन दिया जाता है लेकिन इस बीमारी का कोई एंटीबायोटिक इलाज नहीं है इसलिए अँटीसिरम इंजेक्शन लगवाना जरूरी है क्योंकि ये रैबीज़ के वायरस को खत्म करने में मदद करता है लेकिन ये बहुत ही मॅहगी दवा है इसे हर कोई अफ़्फोर्ड नहीं कर सकता है इसलिए कुत्ते के काटने पर सबसे बेहतर और सस्ता इलाज आयुर्वेद में है इसके लिए आपको कोई ज्यादा पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं है इस उपाय को करने के लिए आप को केवल कुछ इमली के बीज लेना है और लहसुन की कुछ कलियाँ लेनी है.

और आपको इमली के बीजों को अच्छी तरह से साफ़ कर लेना और उनके ऊपरी छिलकों को निकल लेना और इन बीजों को लहसुन के साथ मिलाकर पीस लेना है और इस मिश्रण को उस जगह पर लगाना है जंहा कुत्ते ने अपना दांत लगाए है. और इसे कुछ देर तक लगा रहने दें.और जितना हो सके विटामिन सी युक्त भोजन का सेवन रोगी कराएं क्योंकि  इससे संक्रमण से जूझने में सहायता मिलेगी. विटामिन बी बहुत ही कारगर है क्योंकि ये शरीर में रोग प्रतिकारक शक्ति बढ़ता है.

कुत्ते के काटें पर सबसे पहले आपको घाव को धो लेना चाहिए उसके बाद आपको एक आयुर्वेदिक दवा मरीज़ को देनी है ये बहुत असरदार और सुरक्षित दवा है. इस दवा का नाम Hydorfobinium 200 है. और ये पूर्णता होम्योपैथिक दवा है और ये दवा आपको किसी भी आयुर्वेदिक स्टोर पर आसनी से मिल जाएगी लेकिन इस दवा का इस्तेमाल आपको किस प्रकार करना है इसको जाना भी जरूरी है. इस दवा को रोग को दिन में हर 10 मिनट पर 3 -3 बूँद मरीज के मुँह में डालना है और इसके इस्तेमाल से रोगी पूरी तरह से ठीक हो जायेगा. चाहे उसे किसी भी प्रकर के पागल कुत्ते ने काटा हो.

कुत्ते के काटने का इलाज संभव है. अलर्क का रोग केवल रैबीज़ वाले कुत्ते के काटने पर ही फैलता है इसलिए इस दवा का उपयोग तभी करे जब आपको पागल कुत्ता काट लें. और यदि आपको कोई पालतू या साधारण कुत्ता काटता तो आपको घवराने की जरूरत नहीं आपको केवल अपने मन का भ्रम दूर करना है और हमारे शरीर का इम्युनिटी सिस्टम इस रोग को दूर करने के लिए काफी है इसलिए कुत्ते के काटने पर सबसे बेहतर इलाज सिर्फ साबधानियॉ है जो कि आपको रखनी चाहिए और किसी भी तरह की गभीर समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह जरूर लें.