सांस की बीमारी का इलाज

सांस की बीमारी का इलाज : वेसे तो आप इस बीमारी के बारे में जानते ही होंगे सांस की बीमारी में सांस फूलने लगती हैं| और इस सांस के फूलने को कभी कभी कई लोग गलतफहमी के चलते दमा का रोग समझ लेते हैं| पर ऐसा नहीं होता हैं ये सांस कई कारणों से फूल सकती हैं वही कही लोगों का सोचना होता हैं|

सांस फूलना क्या हैं
सांस फूलना क्या हैं

मोटे इंसानों को ये बीमारी होती हैं लेकिन ऐसा भी नहीं हैं| ये बहुत पतले लोगों को भी हो सकती हैं| हमें जीवित रहने के लिए सांस लेने की जरुरत होती हैं और जब हम सांस हैं| तो वायु के जरिये लेते हैं| ये बीमारी आमतौर पर हो रही हैं आज के समय में इसके कई कारण तो हमारे आसपास ही मौजूद होते हैं|

सांस फूलना क्या हैं?

हम सांस हमारे फेफड़ो से लेते हैं लेकिन जब हमारे फेफड़ें में ही कोई दिक्कत आ जाये| तो हमारे फेफड़ों को सांस लेने में बहुत तकलीफ होती हैं| और जब भी हल्का या भारी काम करते हैं तो उस काम को करने में सांस फूलने लगती हैं| लेकिन इसका इलाज भी मुमकिन हैं इसलिए ज्यादा परेशान होने की जरुरत नहीं हैं|

सांस लेने के लिए जो हमारे फेफड़ों में सांस लेने के छेद होते हैं| उन छेद को बलगम ढक लेता है आप जब किसी डॉक्टर के पास जाते हैं| तो जो आप के फेफड़ों पर बलगम जम जाता है उसी का वह डॉक्टर इलाज करता हैं| और हम ठीक हो जाते हैं लेकिन हम आज आपको कुछ उपचार बताएँगे जिनसे भी आप ठीक हो सकते हैं|

सांस फूलने के कारण

सांस फूलने के कई कारण हो सकते हैं लेकिन सांस मानव में दो तरह से फूलती हैं| कुछ लोगों में सांस कुछ समय के लिए ही फूलती हैं और एक समय के बाद ठीक हो जाती हैं| ऐसी सांस फूलने के कुछ सामान्य कारण हो सकते हैं|

सांस फूलने के कारण
सांस फूलने के कारण

अधिक वजन बढ़ने के कारण
सिमित आकर से बाहर होने के कारण
वायु प्रदूषण या हवा में एलर्जिक पदार्थ का शामिल हो जाने के कारण
अधिक तापमान बढ़ने के कारण
अत्यधिक और जोरदार व्यायाम करने से
अधिक चिंता करने से

ये गंभीर स्थिति के संकेत भी हो सकते हैं

वहीं कुछ लोगों में सांस फूलने की परेशानी अधिक समय तक रहती हैं| ऐसे में चिंता करने की बात हैं क्योकि ये किसी बीमारी के लक्षण भी हो सकते हैं|

आस्थमा के कारण
एनीमिया के कारण
क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) रोग के कारण
दिल के कार्यों में असामान्यता के कारण
फेफड़ों में कैंसर के कारण
फेफड़ों से सबंधित रोग के कारण

सांस की बीमारी के लक्षण

गंभीर एलर्जी की प्रतिक्रिया
श्वसन मार्ग अवरूध्द होना
दिल का दौरा पड़ना
दिल रुक जाना
हृदय का आकार बढ़ना
दिल में सूजन होना
फेफड़ों में खून के थक्के जमना
निमोनिया
कार्बन मोनोक्साइड पाईजनिंग
बाहरी चीजों व पदार्थों को सांस द्वारा अंदर खींचना

सांस फूलने से जुड़े जोखिम कारक

पहले कभी हुए फेफड़ों सबंधित रोग, सांस की समस्या पैदा करने वाले कारक बन सकते हैं|
मांसपेशियों में कमजोरी
हीमोग्लोबिन स्तर कम
व्यायाम में कमी या बीमारी के कारण शारीर का असामान्य आकार
गंभीर मोटापा
लगातार एलर्जिक पदार्थों के संपर्क में आना
धूम्रपान करना

सांस फूलने की समस्या में केला अधिक मात्रा में नही खाना चाहिए| और नींबू के पानी को हल्का गरम पीना चाहिए पानी उबालकर और थोड़ा हल्का गरम पीना ही लाभकारी होता हैं आप इसे बिना गर्म किये ना पियें|

सांस की बीमारी का इलाज

अंजीर(Common fig): सांस फूलने की बीमारी वाले व्यक्तियों के लिए अंजीर अमृत के समान हैं| क्योंकि अंजीर छाती में जमी बलगम और सारी गंदगी को बाहर निकाल फेक देने में सहायक होता है| जिससे सांस नली साफ़ हो जाती हैं और सुचारू रूप से कार्य करती हैं|

इसका उपयोग के लिए आप तीन अंजीर गरम पानी से धोकर रात को एक बर्तन में भिगोकर रख दें| फिर सुबह खाली पेट नाश्ते से पहले उन अंजीरों को खूब चबाकर खाए उसके बाद वह पानी भी पी लें| इस नुस्खे का प्रयोग लगातार एक महीने तक कीजिये| इसके प्रयोग से फर्क आपको खुद ही महसूस होने लगता हैं|

तुलसी (Basil) और सौंठ (Dry Ginger) का काढ़ा: तुलसी में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के गुण पाए जाते हैं| और तुलसी श्वसन तंत्र पर बाहरी प्रदूषण और एलर्जी के हमले से रक्षा करने में समर्थ हैं| इसलिए जिनको भी सांस फूलने की या दमा की शिकायत हो उन लोगो को तुलसी से बने इस काढ़े का इस्तेमाल अवश्य ही करना चाहिए|

तुलसी (Basil) और सौंठ (Dry Ginger) का काढ़ा
तुलसी (Basil) और सौंठ (Dry Ginger) का काढ़ा सांस के उपचार के लिए

तुलसी के उपयोग करने के लिए आधा कप पानी में 5 तुलसी की पत्ती, एक चुटकी सौंठ पाउडर, काला नमक और काली मिर्च डालकर अच्छे से उबाले| और फिर ठंडा करके जब यह काढ़ा गुनगुना सा रह जाए तब इसका सेवन करें| प्रतिदिन इस काढ़े के सेवन से आपके सांस फूलने की समस्या जड़ से समाप्त हो जाएगी|

सांस फूलने की घरेलू दवा

अजवायन (Thymes): श्वसन नली को साफ़ करने और सूजन को काम करने में अजवाइन बहुत ही अच्छा उपाय होता हैं| इसके लिए स्टीम या भाप लेना बहुत मददगार होता हैं भाप लेने से यदि श्वास नली में सूजन ठीक होती हैं| और उसमे आराम हो जाता है और कचरा भी निकल जाता हैं|

अजवाइन का उपयोग करने के लिए आपको अजवायन को पीसकर पानी में उबलना होता हैं| फिर जब ये अच्छे से उबाल जाएँ तो इसकी भाप लेना होता हैं| क्योंकि अजवायन की भाप सूजन को खत्म और दमे और सांस फूलने की समस्या में राहत दिलाती हैं|

तिल का तेल (Sesame oil): कही लोगों को सर्दी के कारण सांस की परेशानी होती हैं| और ठंड की वजह से छाती जाम हो जाती हैं या रात के समय दमे का प्रकोप बढ़ जाता हैं| और सांस ज्यादा फूलने लगे तो तिल के तेल को हल्का गर्म करके छाती और कमर पर गरम तेल की सिकाई करें इससे छाती जल्द ही खुल जाएगी| और सांस का फूलना भी बंद हो जायेगा ये परेशानी ठण्ड के समय ही होती हैं वैसे तो आम रहता हैं|

अंगूर (grapes): सांस फूलने या दमा की समस्या से राहत दिलाने में अंगूर बहुत लाभदायक होते हैं | इस समस्या से निजात पाने के लिए आप अंगूर भी खा सकते है या अंगूर का रस का भी सेवन कर सकते हैं | कुछ चिकित्सकों का तो यह दावा हैं कि दमे के रोगी को अगर अंगूरों के बाग में रखा जाए तो दमा, सांस फूलने या कोई भी श्वसन सम्बन्धी समस्या में शीघ्र लाभ पहुंचता हैं|

अंगूर (grapes)
अंगूर (grapes) सांस के उपचार के लिए लाभदायक

हींग (Asafoetida): हींग का प्रयोग दैनिक दिनचर्या में हर रोज करना चाहिए| क्योंकि हींग का रोजाना सेवन करने से आपको कभी सांस फूलने की समस्या आएगी ही नही, बाजरे के दाने जितनी हींग को दो चम्मच शहद में मिला लें| इसको दिन में तीन बार थोड़ा-थोड़ा पीने के साथ लें इससे सांस फूलने की समस्या एकदम ठीक हो जाएगी|

सांस फूलने की बीमारी के लिए कुछ घरेलू नुस्खे

नीबू (lemon) का रस: नींबू का सेवन करना सेहत के लिए बहुत ही अधिक लाभकारी होता हैं| और सांस के लिए तो इसे अमृत कहा जा सकता हैं सांस फूलने या दमा की समस्या में नीबू का रस गरम पानी में मिलाकर पीना चाहिए| इससे सांस की समस्या धीरे धीरे जड़ से खत्म हो जाती हैं|

सौंफ (Fennel): हींग की तरह ही सौंफ का सेवन करना चाहिए इसे भी आप अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करें| इसके सेवन से शरीर में ठंडक रहती हैं क्योंकि सौंफ में बलगम को साफ करने के गुण पाए जाते हैं| यदि दमे के रोगी और सांस फूलने वाले रोगी नियमित रूप से इसका काढ़ा का इस्तेमाल करते रहें| तो निश्चित रूप इस समस्या से निजात मिल जाएगी|

चौलाई (Amaranth) के पत्तों का रस: सांस की समस्या के संधान के लिए चौलाई के पत्तों का उपयोग करना लाभकारी होता हैं| इससे बहुत ही जल्द लाभ मिलता हैं इसके लिए आपको चौलाई के पत्तों का ताजा रस निकालकर और इस रस में थोड़ा सा शहद मिलाकर प्रतिदिन सेवन करना चाहिए| चौलाई के पत्तो का प्रयोग आप किसी भी रूप में कर सकते हैं आप चाहे तो चौलाई के पत्तो के सब्जी भी बना कर खा सकते हैं|

लहसुन (Garlic): लहसुन की 3 कलियों को दूध में उबालना हैं और फिर उस दूध को छानकर रात में सोने से पहले पी कर सोना हैं| याद रहे इसके बाद कुछ भी न खाये या पिए और इसका उपयोग आपको कुछ ही दिन करना होगा उसके बाद आप ठीक हो जायेंगे|

लौंग और शहद से सांस फूलने की समस्या को दूर ऐसे करें

लौंग (Cloves) और शहद (Honey): लौंग और शहद का काढ़ा पीने से श्वास नली की रुकावट दूर हो जाती हैं| और श्वसन तंत्र मजबूत होता हैं इसके लिए चार-छः लौंग को एक कप पानी में उबाल लें| फिर उसमे शहद मिलाकर दिन में तीन बार थोड़ा-थोड़ा पीने से सांस फूलने की समस्या एकदम ठीक हो जाती हैं| और आपका श्वसन तंत्र भी मजबूत हो जाता हैं|

लौंग (Cloves)और शहद(Honey)
लौंग (Cloves)और शहद(Honey)

सुहाग और मुलहठी: सुहागे की खील बनाकर चूर्ण तैयार कर लें फिर इसमें मुलहठी का चूर्ण बराबर मात्रा में मिला लें| और आधा से एक ग्राम की मात्रा शहद मिलाकर चाटें इससे श्वास नली के कष्ट दूर होकर दमा, खांसी और जुकाम में लाभ मिलता हैं| इस चूर्ण को गरम जल के साथ भी लें सकते हैं आयु के अनुसार मात्रा अधिक या कम कर सकते हैं| इसका सेवन तीन-चार सप्ताह तक करना होता हैं|

सहजन के पत्ते: सहजन के पत्तों का सूप 18 मि.ली. के लगभग तैयार कर उसमें थोड़ा नमक, काली मिर्च और नीबू का रस मिलाकर पीने से दमा, ब्रोंकाइटिस और क्षय और अन्य श्वास सम्बंधी रोग दूर होते हैं|

खास जड़े: हरड़, बहेड़ा और आंवला, विधार, असगन्ध, काली मिर्च, सौंठ, वायविडंग, पुनर्नवा, चित्रक की जड़ की छाल और सतगिलीय बराबर मात्रा में लेकर कूट-छानकर पांच-छह ग्राम की गोलियां बना लें छाया में सुखाकर एक गोली प्रातः दूध से लेने से सांस की बीमारी में लाभ मिलता हैं|

सांस फूलने की समस्या की रोकथाम
  • सांस को रोकना नहीं चाहिए और ना ही रोकने की कोशिश करना चाहिए|
  • पंखे के आगे जाकर बैठें और हवा को चेहरे पर लगाने दें इससे चेहरे को राहत मिलती हैं|
  • यदि आपका वजन अधिक हैं तो अपने वजन को काम करने की कोशिश करें|
  • अगर आप 5,000 फिट के आसपास की ऊंचाई पर हैं तो तनाव और अधिक परिश्रम से बचें|

करेला की जड़: करेले की जड़ का चूर्ण बनाकर इसका एक चम्मच चूर्ण लेकर उसमे शहद मिलाकर रात्रि के समय खाने से दमे के रोगी की रात आराम से कटती हैं| लगभग एक माह तक देने से आशातीत लाभ होता हैं करेले की जड़ के उक्त चूर्ण में तुलसी के पत्तों को मिलाकर देने से भी लाभ होता हैं|

विटामिन-E: दमे के रोगी के लिए विटामिन-E लाभदायक हैं| यह अंकुरित गेहूं, सोयाबीन, पिस्ता, सूरजमुखी का तेल, नारियल, घी, मक्खन, टमाटर, अंगूर और सूखे मेवों से प्राप्त होता हैं| इनका प्रयोग करने से विटामिन-E की आपूर्ति होती रहती हैं|

पालक के पत्ते: पालक के पत्तों और दो चम्मच मेथीदाना का काढ़ा बना लें| इसमें चुटकी भर अमोनियम क्लोराइड और शहद मिलाकर 30 मि.ली. की मात्रा दिन में तीन बार देते रहने से लाभ होता हैं| इस उपाय से आपको बहुत ही जल्द आराम मिल जायेगा|

सूर्यमुखी के बीज: सूर्यमुखी के बीज दमा के रोगी के लिए बहुत लाभदायक हैं| सूर्यमुखी के बीजों के एक चम्मच चूर्ण में दो चम्मच शहद मिलाकर दिन में एक या दो बार देना चाहिए| सूर्यमुखी के फूलों के काढ़े में शहद मिलाकर सेवन करने से भी दमे में लाभ होता हैं| तथा श्वास नली के कष्ट दूर होते हैं शहद अपने आप में बहुत उपयोगी औषधि हैं| इससे स्वरयंत्र के कष्ट दूर होने में सहायता मिलती हैं|