कान से कम सुनाई देने का इलाज – Kaan Se Kam Sunaai Dene Ka ilaj

कम सुनाई देने का इलाज :- आज के इस शोर भरे दौर में बहरापन एक आम बात है. हर कई Cars Bus Trains जोर जोर से बजने वाला horn आदि Factories का सायरन आदि बहुत तेज sound wave reduce करते है और बहरापन ध्वनि को सुनने की Power का ह्रास होने की स्तिथि को कहा जाता है.

जिसमे व्यक्ति को काम सुनाई देने लगता है और कम सुनाई देने का इलाज करना पडता है. और तेज आवाज़ से सुनने की Power ही कम नहीं होती, बल्कि व्यक्ति की physically और mentally problems भी बढ़ जाती है. और जब सुनाई देने की शक्ति ख़त्म हो जाती है तो जब भी सामने वाला व्यक्ति कुछ बोलता है तो वो ध्वनि तरंंगों के द्वारा हवा में कंपन पैदा करता है.

कम सुनाई देने का इलाज और लक्षण

और उसी कपंन से हमें सुनाई देता है पर कम सुनाई देने के करना हम उस कम्पन को सुन नहीं पाते है. और बहरापन केवल एक कान में नहीं बल्कि दोनों कानो में हो सकता है क्योंकि किसी को एक कान से कम सुनाई देता है तो किसी को दोनों कानो से कम सुनाई देने लगता है और कम सुनाई देने का इलाज भी है ये इलाज बहुत ही आसान है.

कान से कम सुनाई देने का इलाज और लक्षण

कान से कम सुनाई देने के लक्षण और कारण कई सारे है. और यदि आप भी इसी तरह की समस्या से परेशान है. सबसे पहली बात की ये एक प्राकृतिक समस्या भी क्योंकि जब व्यक्ति बूढ़ा होने लगता है तो उम्र बढ़ने के साथ साथ इसी समस्या हो जाती है. और जिन लोगो पर व्यावसायिक जोखिम होता है उन्हें भी बहरापन की समस्या आ जाती है.

और यदि कान में गलती से कोई मोम डाल देता है तो भी बहरापन आने लगता है. आजकल सबसे ज्यादा कम सुनाई देने की समस्या यौंगेस्टेर में देखी जा रही है क्योंकि वो दिनभर या तो फ़ोन पर गाने सुनते है. या लड़का लड़की एक दूंसरे से घंटो तक मोबाइल कान से चिपका कर बातें करते रहते है.

कम सुनाई देने का उपचार
कम सुनाई देने का उपचार

केवल इतना ही बल्कि कान में सक्रंमण होने के कारण भी बहरेपन की समस्या हो जाती है. आज कल पुराने तौर तरीको से शादी या प्रोग्राम नहीं होता है हर कोई बढे बढे साउंड सिस्टम तेज आवाज़ में बजाकर ख़ुशी मानते है इसके कारण भी बहरापन एवं कम सुनाई देने आदि जैसी समस्या हो जाती है. और गलत दवाईयों का सेवन एवं कान में हड्डियों का विकास रुक जाना या फिर बढ़ते रहना आदि बहरेपन के कारण है.

कम सुनाई देने का इलाज और लक्षण

कम सुनना या बहरेपन के लक्षणों का हमें धीरे-धीरे पता चलता है जिसके कारण इसका सही समय पर उपचार नहीं हो पाता। लेकिन जब भी हमें इसके लक्षणों के बारे में पता चले, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, बल्कि डॉक्टर के पास जाकर इसका इलाज करवाना चाहिए इसके लक्षण है.

जैसे कानों मे सिटी की आवाज़ सुनाई देना, कम सुनाई देना या ऊंचा सुनाई देना, किसी से फोन पर बात करने में परेशानी होना, तेज आवाज में टीवी या गाने सुनना, दूसरो से बात करने में असमर्थ होना, दूसरो को जोर से बोलने को कहना आदि ये सब बहरेपन के लक्षण है और जिन्हे कोई भी व्यक्ति आसानी से पहचान सकता है.

कान से कम सुनाई देने का इलाज बहुत आसान है आप को यदि अपने कान की सुनने की शक्ति को बढ़ाना है तो कुछ घरेलू उपाय भी है जैसे तुलसी और सरसों, सरसों और धनियां,प्याज आदि के उपयोग से अच्छा सुनाई देने लगता है.कई बार रुक रुककर आवाजे आती है.

कम सुनाई देने का उपचार

कई बार उसे चीखने चिल्लाने की आवाज भी नहीं सुनाई देती, तो इन उपायों को करें. तुलसी के पत्तों में सरसों का तेल मिलाकर गर्म करें, फिर उसे ठंडा होने पर कान में डालें. सरसों के तेल में कुछ धनिये के कुछ दाने दाल कर पकाएं, जब यह आधा रह जाए तो इसे छान कर कान में एक एक बूंद डाले. कान में सफेद प्याज का रस डालने से बहरापन दूर हो जाता है.

दूध में चुटकी भर हींग डालकर अच्छे से मिलाएं फिर उसे अपने कान में डालें. आप का बहरापन दूर हो जायेगा.लहसुन की सात – आठ कलियों को सरसों के तेल में तब तक गर्म करेंं, जब तक यह काली न हो जाए, फिर इसे छान लें, इस तेल को बूंद-बूंद करके कान में डालें.

एक चम्मच बेल के पत्तों का रस, एक चम्मच अनार के पत्तों का रस दोनों को 100 ग्राम सरसों के तेल में पकाएं. जब यह आधा रह जाए तो उसे उतार लें. इस तेल को नियमित रूप से कान में डालने से बहरापन दूर हो जाता है. कान में दालचीनी का तेल नियमित रूप से डालने से बहरेपन में लाभ मिलता है.

बहरापन दूर करने के घरेलू उपाय

नर्व्स में आई किसी कमी की वजह से सुनने की क्षमता में कमी आई तो जो नुकसान नर्व्स का हो गया है , उसे किसी भी तरह वापस नहीं लाया जा सकता. ऐसे में एक ही तरीका है कि हियरिंग एड का इस्तेमाल किया जाए. हियरिंग एड फौरन राहत देता है और दिक्कत को आगे बढ़ने से भी रोकता है.

बहरापन का घरेलू इलाज
बहरापन का घरेलू इलाज

ऐसी हालत में हियरिंग एड का इस्तेमाल नहीं करते , तो कानों की नर्व्स पर तनाव बढ़ता है और समस्या बढ़ती जाती है. अगर कान की कोई समस्या नहीं है और सुनाई ठीक देता है तो आंखों की तरह कानों के रेग्युलर चेकअप की कोई जरूरत नहीं है. हालांकि कुछ डॉक्टरों का यह भी मानना है कि अगर आपकी उम्र 30 से 45 साल के बीच है.

आपको लगता है कि आपकी सुनने की क्षमता ठीक है, तो भी दो साल में एक बार कानों का चेकअप करा लें. बेहरापन दूर करने के उपाय तो जान लिए लेकिन कुछ सावधानिया रखना बहुत जरूरी क्योंकि ये समस्या किसी को भी हो सकती है. और इसके लिए आप तेज आवाज़ में म्यूजिक सुनना बंद कर दें.

टीवी या साउंड सिस्टम की आवाज़ को कम करके सुनने एवं देखने से फायदा होगा. नहाते समय कान में पानी न जाने दें. किसी भी तालाब, नदी, या स्विमिंग पूल आदि में जाने से पहले कानो में सुई लगा लें.

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