वायरल फीवर का उपचार – Viral Fever Treatment In Ayruveda

वायरल फीवर क्या है – हमारे शरीर में मौसम बदलने के कारण कई सारे बदलाब होते है जिससे हमारे शरीर को रोगों से बचाने वाला इम्युनिटी सिस्टम कमजोर होता जाता है. और मौसम के तापमान में उतार चढ़ाव् होने से शरीर के तापमान में भी अंतर आता है.

जिसके कारण सिर दर्द, बदन दर्द, जोड़ों में दर्द आदि समस्याएं होने लगती है. मौसम बदलने के दौरान जो शरीर में बदलाब होते है उसे ही वायरल फीवर कहते है. वायरल फीवर को नज़रान्दाज़ करना आपको महंगा पड़ सकता है.

वायरल फीवर का आयुर्वेदिक उपचार

वायरल फीवर का आयुर्वेदिक उपचार

क्योंकि ये बहुत खतरनाक फीवर होता है जिसके कारण कई लोग अपनी जान तक गंवा चुके है. और मौसमी बीमारियों के लक्षण पहचानना बहुत ही आसान होता है और ज्यादातर लक्षण आम बुखार के होते है.

वायरल फीवर के लक्षण

वायरल फीवर के लक्षण – ज्यादातर लोगों को होने वाला ये फीवर बहुत ही घातक है. वायरल बुखार से बचने के लिए इसके लक्षण जानना बहुत जरूरी है क्योंकि जब तक बीमारी का पता नही लगता तक उसका इलाज संभव नही है. यदि कोई बीमारी आपको हुई है तो उसके कुछ लक्षण भी होते है.

उसी तरह वायरल बुखार के कुछ लक्षण है जिन्हें आप देख कर पहचान सकते है कि होने वाला भुखार या फीवर वायरल फीवर है या नही. वायरल फीवर जब पहली स्टेज़ पर होता है तो गले में ख़राश, शरीर में थकावट होना, और गले में हल्की ख़ास होना ये वायरल फीवर के लक्षण है.वायरल फीवर के लक्षण

फीवर ज्यादा बढ़ने में पर शरीर की मांसपेशियों में दर्द होता है और बदन में दर्द होता और  शरीर का तापमान बहुत तेज़ हो जाता है एवं बहुत तेज़ बुखार आती है. लगातार खांसी आना, शरीर के जोड़ो में दर्द और यदि बुखार ज्यादा बढ़ जाता है तो दस्त और उल्टियाँ भी होती है.

वायरल बुखार सिम्पटम्स

और गर्दन एवं पीठ के ऊपर रैशज़ हो जाती है जिनमें खुजली होना बेहद आम बात है. लेकिन सर्दीयों का मौसम हो या ना हो पर वायरल फीवर होने बहुत तेज़ सर्दी लगती है. गले में ख़राश होने के साथ साथ गले में जलन और दर्द भी होता है जोकि असहनीय होता है.

बुखार होने पर आंखों लाल हो जाती है और आँखों बहुत ज्यादा जलन का अनुभव होता है जिससे सोने में तकलीफ होती है और एवं गले में ग्रंथियों में सूजन आ जाती है जिससे खाना खाते समय गलें खाना कांटे की तरह चुबने लगता है. ये सारे लक्षण वायरल फीवर है इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे तो तुरंत इसका इलाज करायें.

वायरल फीवर में क्या खाएं

बुखार वायरल फीवर में क्या खाएं – मौसम के बदलते ही यदि आपको शरीर में कोई बदलाब दिखाई दे या फिर ऊपर दिए गएँ लक्षणों में से कोई भी दो लक्षण यदि शरीर में दिखें तो देर न करें क्योंकि घातक फीवर है इससे बचने के लिए अपने खान पान का ख़ास ख्याल रखें और अपनी खुराक में बदलाब करें एवं वायरल फीवर होने पर कुछ फलों को खाने में परहेज़ करें."<yoastmark

यदि आप वायरल बुखार से ग्रसित हो गये है तो घबराएँ क्योकि वायरल फीवर के उपचार विधि भी बहुत आसान है. सभी बीमारियों को दूर करने में पानी सबसे ज्यादातर मददगार क्योंकि पानी अमृत के समान होता है. वायरल फीवर होने जितना हो सके उतना पानी पीयें क्योंकि ये आपके गले में मौजूद ख़राश और सूजन को खत्म करने में बहुत ज्यादा लाभकारी है.

यदि आप वायरल बुखार के वायरस को दूर करना चाहते है तो आप तुलसी के पत्तों से बनी चाय का सेवन करें और हो सके तो तुसली के पत्तों को कच्चा ही चबा चबा कर खाएं जिससे तुसली का रस निकले और ये तुलसी का रस और तुलसी की चाय गले की समस्या और गले को सूजन को कम करता है.

वायरल फीवर में क्या न खाएं

ज्यादातर लोगों को जब वायरल फीवर होता है तो उन्हें खाने में स्वाद नही आता है लेकिन फीवर को दूर करने के लिए आपके उबली हुई सब्जियों का सेवन करें तो भी बिना मिर्च और मसलों के क्योंकि ज्यादा तला भुना और मसालेदार खाने को पचाने के लिए बहुत उर्जा चाहिए.वायरल फीवर में क्या न खाएं

शरीर की उर्जा को वायरल फीवर ख़त्म कर देता है जिसके कारण दस्त और उल्टी होने लगती है इसलिए बिना मसालेदार और उबली हुई सब्जियों का सेवन करें. या फिर आप सब्जियों के सूप को पीयें क्योंकि ये सूप आपके शरीर के जरूरी पोषक तत्व एवं प्रोटीन देता है. जिससे आपका इम्युनिटी सिस्टम मजबूत होता है.

वायरल फीवर कितने दिन रहता है

और रोगों से लड़ने की शक्ति भी आती है. किशमिश खाने से शरीर में ताकत आती है इसलिए फीवर होने किशमिश का सेवन जरूर करें क्योंकि किशमिश एंटीऑक्सीडेंट में भरपूर मात्रा में होते है जो आपके शरीर में फीवर के वायरस को जड़ से मिटाने में मदद करेगा.

यदि किशमिश को लहसुन के साथ मिला कर इसका सेवन करते तो ये भी आपके लिए लहसुन शरीर में गर्मी पैदा करता है. ये लहसुन और किशमिश बुखार आने पर सर्दी को कम करता है. वायरल बुखार लगभग एक सप्ताह तक बना रहता है. लेकिन सही समय पर इलाज ना किया जाएँ तो ये कई दिनों तक बना रह सकता है.

वायरल फीवर ट्रीटमेंट इन आयुर्वेद

बुखार आने पर ये सुनिश्चित कर लें कि ये बुखार वायरल बुखार है या नही, यदि वायरल बुखार है और शरीर का तापामान 103 डिग्री से ज्यादा हो रहा है तो साधा पानी में सूती कपड़े की पट्टियाँ माथे पर रखें ये शारीरिक तापमान को नियंत्रित करने में मदद करेगा और बुखार बढ़ने पर मरीज को सुबह, दोपहर और शाम को पेरासिटामोल की एक एक गोली दें.वायरल फीवर मेडिसिन नाम

याद रहे आपको सिर्फ पेरासिटामोल की गोली देनी और कोई अन्य गोली या दवा देने से पहले डॉक्टर की सलाह लें. बुखार होने पर मरीज को ज्यादा काम नही करने देना है जितना हो सके उतना आराम करने देना है. आयुर्वेद में हर तरह की बीमारी का इलाज है. और वायरल बुखार को दूर करने के लिए कुछ आयुर्वेदिक उपाय है जिन्हें आप आसानी से अपने घर पर कर सकते है.

वायरल फीवर का घरेलू इलाज

तुलसी, अदरक और लौंग का काढ़ा बनाकर बुखार होने पर दिन में कम से कम दो से तीन बार पीयें ये बुखार के वायरस को खत्म कर देगा क्योंकि लौंग शरीर में गर्मी पैदा करेगा और तुलसी के एंटीबायोटिक गुण वायरस को शरीर से दूर करने में मदद करेगा. ये फिर चाय में इन सभी को मिलाकर कर मरीज को रोजाना दें.वायरल फीवर का इलाज

वायरल फीवर का इलाजइससे बहुत जल्दी ही वो ठीक हो जायेगा.धनिया में बहुत सारे गुण है और आयुर्वेद में भी धनिये के गुणों को बताया गया है इसलिए धनिये की पत्तियों को चबाने से भी बुखार दूर हो जायेगा. लेकिन दो दिन से ज्यादा होने पर भी मरीज को कोई आराम न हो तो लापरवाही ना करें और दो दिन तक इन उपाय को करने के बाद मरीज को डॉक्टर के पास अवश्य लें जाएँ.

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