योग के लाभ, योग के नियम, योग के प्रकार और योग आसन

योग की परिभाषा –  भारत एक महान है क्योंकि यंहा ज्ञान का भंडार है एवं भारत के द्वारा दिया गया ज्ञान पूरी दुनिया में अपनाया जाता रहा है और आधुनिक युग में भले भारत विकासशील देशों में आता है. लेकिन कई सारे विकसित देश भारतीय आयुर्वेद एवं योग का अध्ययन करने के हमारे देश में आते है.

आपको जानकार हैरानी होगी कि योग विज्ञानं केवल भारत में ही बल्कि विदेशों में भी बहुत ज्यादा किया जाने लगा है. योग की शुरआत कई बर्षों पूर्व हुई थी जिसमे कई सारी कलाएं एवं क्रियाएं होती है. एवं योग करने के तरीके एवं योग को ठीक से जानने के लिए इसे अपने रोजमर्रा के जीवन अपनाएं और खुद को स्वस्थ बनाने के लिए इसका उपयोग करें.

योग के लाभ

योग की परिभाषा

आपके भौतिक, मानसिक, भावनात्मक, आत्मिक और आध्यात्मिक रूप से जोड़ने में मदद करता है.व्यायाम और प्राणायाम से बेहतर योग क्योंकि योग अर्थ होता है एकता और बांधना एवं योग शब्द संस्कृत के ‘युज’ से लिया है जिसका अर्थ भी ‘जुड़ना’ ही होता है.

योग करने से होने वाले लाभ

इस योग को करने से आपको मानसिक और शारीरिक दोनों तरह के लाभ होते है एवं योग आपके के लिए काफी लाभकारी है और ये योग इतना शक्तिशाली है की ये कई रोगों को ठीक करने में मदद करता है. योग अस्थमा, मधुमेह, रक्तचाप, गठिया, पाचन विकार और अन्य बीमारियों को ठीक करने के उपाय है.

आधुनिक युग में सफल उपचार के लिए योग सबसे बेहतर उपाय है क्योंकि योग कई गंभीर रोगों को मिटाने में बहुत ही कारगर उपाय है. और जैसे जैसे चिकित्सा विज्ञान तरक्की कर रहा है. वैसे वैसे ही कई रोग बढ़ते जा रहे है. योग विद्या के द्वारा इन बीमारियों की ठीक किया जा सकता है.

योग का शाब्दिक अर्थ

योग के लेकर ज्यादातर लोगों को मानसिकता ये है कि योग सिर्फ तनाव को दूर करने का साधन है एवं ये सिर्फ समाजिक स्तर पर लोगों स्वस्थ बनाए रखने के लिए बेहद उपयोगी है. योग कई बुरी आदते जैसे कि व्यायाम ना करना, ग़लत ख़ान-पान रखना, सारे दिन कुर्सी पर बैठे रहना, मोबाइल फोन को ज़्यादा इस्तेमाल करना आदि को छोड़ने के लिए बेहद असरदार है.

योगासन एवं योग के कुछ नियम

यदि आप स्वस्थ जीवन लालसा रखते है, एवं खुद को बीमारियों से मुक्त रखना चाहते तो नियम का पालना करना बहुत जरूरी है हर कार्य में नियम होते है. जीवन के कुछ नियम है जिनका पालन न करने वालों को इसका परिणाम भी भुगतना पड़ता है. योग के भी नियम है जो बहुत आसान है इन नियमों का पालन करने से आप योग का पूरा लाभ प्राप्त कर पाएंगे.

योग के नियम

शुरुआत में योग करने से पहले योग के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर लें एवं योग के लिए किसी योग गुरु या योग एक्सपर्ट के निर्देश लें तो ये आपके लिए बहुत फायदेमंद होगा. योग करने का सही समय सूर्योदय या सूर्यास्त है. जिनका हो सके खुद को गंदगी से बचा कर रखें एवं योग करे से पूर्व नाहा लें क्योंकि इससे शरीर का बाहरी शुद्धिकरण हो जाता है.

योग के फायदे

बिना खाना खाये योग की शुरुआत करें और योग करने से दो घंटे पहले कुछ न खाएं, योग करने के लिए अपने पहनावे पर ध्यान आप ज्यादा तंग कपड़े योग करने के लिए न पहने आप सूती कपडे पहनें जो आरामदायक  हो और जिससे हाथ पैर मोड़ने में कोई तकलीफ न है. आप जिस तरह योग से पहले तन को शुद्ध करते है उसी तरह अपने मन को भी शुद्ध करें मन में आने वाले बुरे विचार को रोकें . रोजाना योग करें, योग के बाद एक घंटे तक कुछ भी न खाएं एवं एक घंटे बाद तक स्नान न करें.

स्थान चुनाव बहुत सोच समझ कर करें आप योग करने के लिए शांत वातावरण एवं स्वच्छ स्थान को चुनें. योग क्रिया के दौरान अपने मन को भटकने न दें आप ध्यान को एक स्थान पर केंद्रित रखें, एवं योग करने में किसी भी तरह की जल्द वाज़ी न दिखाएँ जब आपको सम्पूर्ण समय हो तभी योग करें और योग एक दिन में नहीं सीखा जा सकता है. धैर्य और दृढ़ता योग क्रिया करें.

आपको योग करने के लिए लचीले शरीर की आवशयकता है, इसलिए अपने शरीर के साथ किसी भी तरह की जबजस्ती न करें अपने शरीर को उतना ही मोड़ें जितना हो सकें. और योग करने में किसी भी तरह की तकलीफ हो तो धीरज रखें. यदि आपको शारीरिक कोई तकलीफ है तो योग करने से पहले डॉक्टरी सलाह जरूर लें.

योग के प्रकार – Types of Yoga in Hindi

सांस्कृतिक वेदों एवं योग विज्ञान के अनुसार योग के चार प्रकार है जिसमें पहला राज योग, दूसरा कर्म योग, तीसरा भक्ति योग और अंत में ज्ञान योग है ये चार प्रकार के योग है. राज योग में योग के आठ अंग है और इस योग को  “अष्टांग योग”  भी कहते है. और इस योग को  8 अंगों के प्रकार है, यम (शपथ लेना), नियम (आचरण का नियम या आत्म-अनुशासन), आसन, प्राणायाम (श्वास नियंत्रण), प्रत्याहार (इंद्रियों का नियंत्रण), धारण (एकाग्रता), ध्यान (मेडिटेशन), और समाधि (परमानंद या अंतिम मुक्ति).

योग के प्रकार

दूसरा योग कर्म योग जो कोई कार्य करने से कतराता है वो भी इस योग करने से बच नही सकता है क्योंकि कोई भी क्रिया जो मनुष्य के द्वारा की जाती है वो योग है. योग के विषय में जागरूक होने से हम वर्तमान को अच्छा भविष्य बदलने की कोशिश कर रहे है. मन में से नकारात्मकता का भाव मिटाता है ये योग और हम यदि किसी की सेवा करते है वो वह भ कर्म ही है और प्रतेक्य कर्म है कर्म योग है.

जो उस प्रकृति या परमात्मा पर विश्वास करता है उस क्रिया को भक्ति योग कहते है और भक्ति योग भक्ति के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है. ये उन सभी रोगों को मिटाता है जो मनुष्य अपने दिमाग में कुसंगति के कारण पैदा करता है एवं ये योग स्वीकार्यता और सहिष्णुता के लिए हमें शक्ति देता है.

इस योग का अंतिम प्रकार है ज्ञान योग लोगों को भक्ति के मार्ग योग्य बनाता है, ज्ञान योग बुद्धि का योग है, ऋषि एवं मुनियों ने एक मार्ग को बताया है और इसी आधार पर कई ग्रन्थ भी लिखे गये है. जो बौद्धिक रूप से इच्छुक हैं, ज्ञान योग की ओर आकर्षित होंते है.

योग करने के उचित समय क्या है?

प्रतेक्य बार योग करने के लिए सबसे उचित समय है सुबह और शाम आप दो घटें तक योग को करें. इन दोनों समय आप कभी भी योग क्रिया कर सकते है. एवं कुछ और समय भी जिन पर योग किया जा सकता है. अगर दिन का कोई समय योग के लिए निर्धारित कर लें, तो यह उत्तम होगा. योग करने के योगा मैट या दरी बिछा कर रखें क्योंकि इससे शारीरिक एनर्जी जमीन पर नही जाएगी.

अपने ध्यान और मानसिकता में बदलाब लायें यदि आप रोजाना योग करना चाहते है तो योग का कोई भी आसन हमेशा मन से करें शांत स्थान पर योग करें कोई पार्क या ग्राउंड आपके के लिए सबसे सही रहेगा और इसे स्थान पर शांति और स्थिरता रहेती है जिससे विचारों में शांति आती है. ध्यान केन्द्रित रखें. और यदि अप बहुत ज्यादा थके हुए तो योग करने का विचार भी न बनायें.

योग आसन

जो लोग पहली बार योग कर रहे है या फिर आज से पहले कभी भी योग नही किया है उनके लिए कुछ सुझाब है एवं योगाभ्यास के कुछ नियम भी है जिन्हें ध्यान से पढ़े और जीवन  में अमल करें. जैसे शुरुआती दौर में आपके शरीर में लचीलापन कम होता है तो इसलिए आपको शुरुआत में योग करने में कठिनाई हो सकती है. रोजाना अभ्यास से ये समस्या भी दूर हो जाएगी एवं मांसपेशियों और जोड़ों में खिचाव कम होने पर भी धीरे-धीरे लचीलापन आ जायेगा.
​ज्यादा समय तक योग न करें.

योगाभ्यास करते समय कुछ सावधानियां रखें

सबसे पहले महिलाओं के विषय में बात तो मासिक धर्म के दौरान योग का अभ्यास नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे शरीर में तकलीफ़ बढ़ सकती है लेकिन आप चाहे तो योग कर सकती है ये आपके ऊपर निर्भर करता है किंतु आप अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार यह अनुमान लगा सकती हैं कि आपको मासिक धर्म के दौरान योगाभ्यास सूट करता है कि नहीं.

गर्भावस्था में योग न करें और यदि योग करना ही है तो किसी योगा गुरु के अंडर में योग का अभ्यास करें एवं तकलीफ़ होने पर योग न करने की सलाह दी जाती है एवं जिन कि 10 वर्ष से कम आयु है जो भी बच्चे योग करते है उन्हें कठिन आसन न करने दें.

इससे मांसपेशियों के ख़राब होने का डर रहता है एवं योग के साथ साथ अपने खानपान का भी ख़ास ध्यान रखें एवं धूम्रपान करने के विषय में विचार भी ना लायें यदि आपको इसकी लत है तो तुरंत इस लत छोड़े एवं खुद को स्वस्थ बनायें.

 

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